sapne sach ho jaaye

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पुस्तक की लेखिका रमादेवी रत्नसामी एक सेवानिवृत्त अंग्रेजी शिक्षिका हैं। वह विभिन्न शिक्षक संगठनों में जिम्मेदारियां संभालते हैं। वह महिलाओं की उन्नति के लिए काम करती रहती हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में महिलाओं के मुद्दों पर दो बार बात की है। उन्होंने दस से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। “सपने सच हो जाएं’ उनकी पहली तमिल पुस्तक है। यह हिन्दी में अनुवादित पहली पुस्तक भी थी।

नारीबाद के बारे में विस्तार से बोलने वाले सरुचि पूर्ण श्रेष्ठ लेख लिखा हे लेखिका रमादेवी विश्व महिला दिवस पर यह किताब विचार पूर्वक ओर भी बल पूर्वक रहेगा। नारिलोग आज कई तरह के अधिकार पाए हैं फिर भी ये अधिकार जिसे दिये हैं, जिसे देना चाहिए उसके बारे में लेखिका के दृष्टिकोण और खोज ही वह किताब है। लड़कियों की जागृतक शिक्षण योजना में यह किताब जोडेजायें तो महिला अधिकार संगठन के सपने सच हो जाएगी।

क. बालभारती मिल के पूर्व विधानसभ

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